ईरान के मिरजावा के सुन्नी इमाम जुमा का अहम बयान- हज़रत अली अस से मोहब्बत सुन्नी मुसलमानों के ईमान की पहचान है।
ईरान के दक्षिण-पू र्व में मिर्जावा के सुन्नी समुदाय के इमाम जुमा मौलवी अब्दुर्रहीम रीगियानपुर ने कहा: कि ग़दीरे ख़ुम की घटना सुन्नी धर्म के मान्य किताबों में भी भी दर्ज है। हज़रत अली अलैहिस्सलाम से मोहब्बत सुन्नी मुसलमानों के ईमान की पहचान है। पार्स टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, सुन्नी समुदाय का मानना है कि ग़दीर की घटना वास्तव में हुई थी और उसमें पैगंबर मोहम्मद ने हज़रत अली की बहादुरी, मोहब्बत, ईमान, परहेजगारी और न्याय के बारे में कहा था ताकि यह हमेशा
Read moreایران کے سپریم لیڈر: پارلیمنٹ کی قدروقیمت کا صحیح پیمانہ ان کے اہداف اور اصول ہیں
تہران- ارنا- رہبر انقلاب اسلامی ایران نے پارلیمنٹ ممبران سے ملاقات میں اس بات پر تاکید کی کہ دنیا میں قانون ساز اسمبلیوں کے حقیقی مقام کا اندازہ ان کے اہداف، مشن کی سمت اور کام کی بنیاد پر کیا جاتا ہے اور ایرانی پارلیمنٹ اس نقطہ نظر سے بہترین ہے۔ انہوں نے ممبران کے لیے انقلاب کے اصولوں پر کاربند رہنے، مخالفانہ بیانات کا فیصلہ کن جواب دینے اور قومی اقتدار کو برقرار رکھنے کی ضرورت پر زور دیا۔ رہبر انقلاب اسلامی ایران
Read moreدس کلومیٹر غدیری دسترخوان، ایران سمیت 20 ممالک میں جشن کا ماحول
10 کلومیٹر غدیری دسترخوان، ایران سمیت 20 ممالک میں جشن ہوگا غدیر کمیٹی کے ترجمان ساسان زارع نے اعلان کیا ہے کہ اس سال 10 کلومیٹر طویل غدیری دسترخوان نہ صرف تہران بلکہ ایران کے 500 شہروں اور دنیا کے 20 ممالک میں عید غدیر کے دن بیک وقت بچھایا جائے گا۔ ٱلْـحَمْدُ لِلّٰہِ ٱلَّذِي جَعَلَنَا مِنَ الْمُتَمَسِّكِينَ بِوِلَايَةِ أَمِيرِ الْمُؤْمِنِينَ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ عَلَيْهِ ٱلسَّلَامُ۔ تمام تعریف اس اللہ کے لیے ہے جس نے ہمیں امیرالمؤمنین علی بن ابی طالب علیہ السلام کی
Read moreعلی اول علی- علی آخر علی | غدیر یعنی کیا؟
غدیر یعنی اعلان خلافت علی ابن ابی طالب علیہ السلام نبی کریم ﷺ نے حجۃ الوداع کے بعد جب مکہ سے واپس مدینہ کی جانب سفر شروع کیا، تو راستے میں “غدیر خم” نامی مقام پر حکمِ خداوندی کے تحت قافلہ کو روک کر ہزاروں حاجیوں کو جمع کیا۔ یہ مقام پانچ راستوں کا چوراہا تھا اور یہاں ایک چھوٹا سا تالاب (غدیر) تھا، اس لیے اسے “غدیر خم” کہا جاتا ہے۔ اللہ تعالیٰ نے سورہ مائدہ کی آیت 67 نازل کی: “يَا أَيُّهَا الرَّسُولُ
Read more‘अब मस्जिद बनाना नहीं होगा आसान..’ इधर सब वक्फ में उलझे
जीवन में हर दिन एक नई शुरुआत होती है। चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न हों, अगर इरादा मजबूत हो तो रास्ता अपने आप बन जाता है। जो लोग हार नहीं मानते, वही आगे बढ़ते हैं और कुछ नया कर दिखाते हैं। कभी-कभी छोटी-छोटी बातें भी हमें बड़ी सीख दे जाती हैं। किसी की मुस्कान, किसी का साथ या एक छोटा-सा प्रेरणादायक शब्द, दिल को छू जाता है और हमें आगे बढ़ने की हिम्मत देता है। आज की दुनिया में जानकारी सबसे बड़ी ताकत है।
कोरियन लड़की की आप बीती- मुझे इस्लाम से नफ़रत थी, जिनता पढ़ती गई मोहब्बत बढ़ती गई
मुझे मध्य पूर्व और अरबों की हर चीज़ पसंद थी, लेकिन इस्लाम से नफ़रत थी, लेकिन मैं जितना इस्लाम के बारे में पढ़ती गई, उनती मोहब्बत बढ़ती गई, यहां तक कि मैं मुसलमान हो गई। जब भी कोई मध्य पूर्व या इस्लाम के बारे में बात करता, बिन सोंचे ग़ौर से उसकी बात सुनती, जब मैं हाई स्कूल में थी तो वामी क़ैम में शामिल हुई। यह वास्तव में तीन दिन और दो रातों की एक पिकनिक है जो इस्लाम और मुसलमानों के बारे में
Read moreअमले उम्मे दाऊद- इमाम सादिक़ (अ) रिज़ाई माँ उम्मे दाऊद
उम्मे दाऊद कहती है कि मंसूर दवानेक़ी ने मदीने में सेना भेजी और हसने मुसन्ना और उनके भाई इब्राहीम को शहीद कर दिया और हसने मुसन्ना, इब्राहीम के पिता को कुछ लोगों के साथ गिरफ़्तार कर लिया, मेरा बेटा दाऊद भी उन लोगों में था। अमले उम्मे दाऊद फ़ातेमा जो कि उम्मे दाऊद ने नाम से प्रसिद्ध है, आप इमाम सादिक़ (अ) रिज़ाई माँ हैं उम्मे दाऊद कहती है कि मंसूर दवानेक़ी ने मदीने में सेना भेजी और हसने मुसन्ना और उनके भाई इब्राहीम को
Read moreशाबान महीने की तीन तारीख- तीसरा चाँद है और तीसरी शाबान है
तीसरी हिजरी कमरी वर्ष के शाबान महीने की तीन तारीख थी। इसी दिन हज़रत अली अलैहिस्सलाम के घर में प्रकाश के चांद हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का जन्म हुआ। तीसरा चाँद है और तीसरी शाबान है | तीसरी हिजरी कमरी वर्ष के शाबान महीने की तीन तारीख थी। इसी दिन हज़रत अली अलैहिस्सलाम के घर में प्रकाश के चांद हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का जन्म हुआ। अस्मा बिन्ते उमैस ने प्रकाश और आध्यात्म से भरे वातावरण में नवजात शिशु को एक सफेद कपड़े में लपेट
Read moreप्रोफ़ेसर हुसैन अनसारीयान का ज़िंदगी नामा और उनके महत्त्वपूर्ण कार्य एवं उनकी फारसी रचनाए
शताब्दियो (सदियो) से शहर ख़ुनसार ने मानव समाज के लिए बड़े विद्वान, साहित्यिक और कलात्मक एवम स्थिर चेहरो को जन्म दिया है। विद्वान (इल्मि) और मलाकूती चेहरे जैसे स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा आक़ा हुसैन ख़ुनसारी (र.अ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा आक़ा जमाल ख़ुनसारी (र.अ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा आक़ा सैय्यद मुहम्मद तक़ी ख़ुनसारी (र.अ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा आक़ा सैय्यद अहमद ख़ुनसारी (र.अ.), एवम दूसरे हज़ारो विद्वान इरान के इसी शहर से संबंध रख़ते है। विद्वान हुसैन अनसारीयान ने 18 आबान (ईरानी साल का नवां महीना) सन 1323 हि.शम्सी

