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  • October 11, 2023
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‘अब मस्जिद बनाना नहीं होगा आसान..’ इधर सब वक्फ में उलझे

जीवन में हर दिन एक नई शुरुआत होती है। चाहे कितनी भी मुश्किलें क्यों न हों, अगर इरादा मजबूत हो तो रास्ता अपने आप बन जाता है। जो लोग हार नहीं मानते, वही आगे बढ़ते हैं और कुछ नया कर दिखाते हैं। कभी-कभी छोटी-छोटी बातें भी हमें बड़ी सीख दे जाती हैं। किसी की मुस्कान, किसी का साथ या एक छोटा-सा प्रेरणादायक शब्द, दिल को छू जाता है और हमें आगे बढ़ने की हिम्मत देता है। आज की दुनिया में जानकारी सबसे बड़ी ताकत है।

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  • October 6, 2023
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कोरियन लड़की की आप बीती- मुझे इस्लाम से नफ़रत थी, जिनता पढ़ती गई मोहब्बत बढ़ती गई

मुझे मध्य पूर्व और अरबों की हर चीज़ पसंद थी, लेकिन इस्लाम से नफ़रत थी, लेकिन मैं जितना इस्लाम के बारे में पढ़ती गई, उनती मोहब्बत बढ़ती गई, यहां तक कि मैं मुसलमान हो गई। जब भी कोई मध्य पूर्व या इस्लाम के बारे में बात करता, बिन सोंचे ग़ौर से उसकी बात सुनती, जब मैं हाई स्कूल में थी तो वामी क़ैम में शामिल हुई। यह वास्तव में तीन दिन और दो रातों की एक पिकनिक है जो इस्लाम और मुसलमानों के बारे में

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  • October 6, 2023
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अमले उम्मे दाऊद- इमाम सादिक़ (अ) रिज़ाई माँ उम्मे दाऊद

उम्मे दाऊद कहती है कि मंसूर दवानेक़ी ने मदीने में सेना भेजी और हसने मुसन्ना और उनके भाई इब्राहीम को शहीद कर दिया और हसने मुसन्ना, इब्राहीम के पिता को कुछ लोगों के साथ गिरफ़्तार कर लिया, मेरा बेटा दाऊद भी उन लोगों में था। अमले उम्मे दाऊद फ़ातेमा जो कि उम्मे दाऊद ने नाम से प्रसिद्ध है, आप इमाम सादिक़ (अ) रिज़ाई माँ हैं उम्मे दाऊद कहती है कि मंसूर दवानेक़ी ने मदीने में सेना भेजी और हसने मुसन्ना और उनके भाई इब्राहीम को

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  • October 6, 2023
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शाबान महीने की तीन तारीख- तीसरा चाँद है और तीसरी शाबान है

तीसरी हिजरी कमरी वर्ष के शाबान महीने की तीन तारीख थी। इसी दिन हज़रत अली अलैहिस्सलाम के घर में प्रकाश के चांद हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का जन्म हुआ। तीसरा चाँद है और तीसरी शाबान है | तीसरी हिजरी कमरी वर्ष के शाबान महीने की तीन तारीख थी। इसी दिन हज़रत अली अलैहिस्सलाम के घर में प्रकाश के चांद हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का जन्म हुआ। अस्मा बिन्ते उमैस ने प्रकाश और आध्यात्म से भरे वातावरण में नवजात शिशु को एक सफेद कपड़े में लपेट

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  • October 1, 2023
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प्रोफ़ेसर हुसैन अनसारीयान का ज़िंदगी नामा और उनके महत्त्वपूर्ण कार्य एवं उनकी फारसी रचनाए

शताब्दियो (सदियो) से शहर ख़ुनसार ने मानव समाज के लिए बड़े विद्वान, साहित्यिक और कलात्मक एवम स्थिर चेहरो को जन्म दिया है। विद्वान (इल्मि) और मलाकूती चेहरे जैसे स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा आक़ा हुसैन ख़ुनसारी (र.अ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा आक़ा जमाल ख़ुनसारी (र.अ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा आक़ा सैय्यद मुहम्मद तक़ी ख़ुनसारी (र.अ.), स्वर्गीय आयतुल्लाह अलउज़मा आक़ा सैय्यद अहमद ख़ुनसारी (र.अ.), एवम दूसरे हज़ारो विद्वान इरान के इसी शहर से संबंध रख़ते है। विद्वान हुसैन अनसारीयान ने 18 आबान (ईरानी साल का नवां महीना) सन 1323 हि.शम्सी

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  • October 1, 2023
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क़ुरआन और मासूमीन अ.स. की हदीस की रौशनी में वालेदैन के लिए औलाद की ज़िम्मेदारियाँ

क़ुरआन और मासूमीन अ.स. की हदीसों में वालेदैन के साथ नेक बर्ताव और अच्छे अख़लाक़ से पेश आने पर बहुत ज़ोर दिया गया है, अल्लाह ने कई जगहों पर अपनी वहदानियत, इबादत और शुक्र अदा करने के हुक्म के साथ वालेदैन के साथ नेक बर्ताव करने और उनका शुक्रिया अदा करने का हुक्म दिया है। इंसान एक सामाजिक मख़लूक़ है इसलिए अल्लाह ने उसे अलग अलग रिश्तों में पिरोया है और हर एक पर दूसरों के कुछ हक़ और कुछ ज़िम्मेदारियां हैं जिसको अदा करना